अये दी ! सच्ची, आप पर हक़ जताने का जी चाहता है। अये दी ! सच्ची, आप पर हक़ जताने का जी चाहता है।
हां,वादों को निभाने में वक्त तो लगता है। अनचाहे पन्नों को पढ़ने में वक्त तो लगता है। हां,वादों को निभाने में वक्त तो लगता है। अनचाहे पन्नों को पढ़ने में वक्त तो ल...
बात सच्ची है यही.... बात सच्ची है यही....
धारा बन जाना, बुलबुले का फूट कर, अनंत में तुम भी मिल जाओगे। धारा बन जाना, बुलबुले का फूट कर, अनंत में तुम भी मिल जाओगे।
एक दूसरे से मन के भीतर की दबी हुई बात। एक दूसरे से मन के भीतर की दबी हुई बात।
फिर क्यों लोग इसे समझने को तैयार नहीं है। फिर क्यों लोग इसे समझने को तैयार नहीं है।